| « Happy Holi !! | Shiv Vandana » |
Mar
01
क्यों शब्दों की गति थम गई ,
क्यों बातों का वेघ शांत हो गया,
क्या ह्रदय की व्यथा ख़त्म हो गई ,
क्या कुछ करने का नशा अब न रहा |
मत ख़त्म होने दो इस जूनून को ,
जलाए रखो आग अपने अन्दर ,
जो एक बार फ़ैल जाय ये सन्देश ,
फिर तुमहारी ख़ामोशी में सूकून भर जायगा |
तब तक चले-चलो , बढे-चलो
चाहे धीरे-चलो पर मेरे दोस्तों
चले-चलो !






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